Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 131
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 131 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 131
संस्कृत श्लोक
आत्मैव देवो भगवाञ्छिवः परमकारणम् ।
ज्ञानार्चनेनाविरतं पूजनीयः स सर्वदा ॥ १३१ ॥
हिन्दी अर्थ
आत्मा ही प्रकाशमान देव, छः प्रकार के एश्वर्य से परिपूर्ण, शिव
ओर परम कारणस्वरूप है । (अतः) ज्ञानरूप पूजन-सामग्री से उसीकी सर्वदा अविच्छिन्नरूप से
निरन्तर पूजा करनी चाहिए