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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 141

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 141 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 141

संस्कृत श्लोक

आकाशं परमाकाशं ब्रह्माकाशं जगच्चितिः । इति पर्यायनामानि तत्र पादपवृक्षवत् ॥ १४१ ॥

हिन्दी अर्थ

यदि शंका हो कि जैसे यजति, ददाति, जुहोति” इत्यादि शब्दभेदो से कर्मभेद होता है, वैसे ही चित्‌. आकाश, जगत इत्यादि शब्दभेदो से उनका भेद हो सकता है ? तो इस पर कहते हैं। आकाश, परमाकाश, ब्रह्माकाश (0) जगत ओर चित्‌-ये सब प्रकार ब्रह्मरूप अर्थ के पयार्यशब्द हैं, जिस प्रकार पेड और वृक्ष शब्द पर्याय हैं