Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 147
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 147 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 147
संस्कृत श्लोक
यथा चिद्व्योममात्रात्म स्वप्ने घटपटादिकम् ।
सर्गादावेव सर्गोऽयं तथा चिद्व्योममात्रकम् ॥ १४७ ॥
हिन्दी अर्थ
सामान्य जगत में कथित न्याय का घट, पट आदि विशेषपदार्थों में दिग्दर्शन कराते हैं।
जैसे स्वप्न में घट, पट आदि चैतन्याकाशमात्रस्वरूप हैं, वैसे ही इस सामान्य सृष्टि के आरम्भ में
विशेषपदार्थ घट, पट आदि भी चैतन्याकाशमात्र स्वरूप ही हैं