Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 151
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 151 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 151
संस्कृत श्लोक
सर्वस्य वस्तुजातस्य जगतोऽन्यस्य ते मम ।
देहो हि चेतनाकाशे परमात्मैव नेतरत् ॥ १५१ ॥
हिन्दी अर्थ
सभी वस्तुओं का, समस्त जगत
का, दूसरे का, तुम्हारा और मेरा चैतन्याकाशरूप परमात्मा ही पारमार्थिक स्वरूप है, दूसरा नहीं