Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
अवश्यनाशो मांसात्मा स्वयं देहो विनश्यति ।
पालितः सुस्थिरां शोभामादत्ते चित्रमानवः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्रित मनुष्य की यदि भली-भाँति रक्षा की जाय, तो वह दीर्घकालिक स्थिर शोभा
धारण करता है और यह प्रत्यक्ष शरीर तो अनेक यत्नं से रक्षित होने पर भी नष्ट ही हो जाता है, बढ़ता
नहीं है