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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

देहस्तु पालितोऽप्युच्चैर्नश्यत्येव न वर्धते । तेन श्रेष्ठश्चित्रदेहो नायं संकल्पदेहकः ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

इसलिए चित्रित देह ही श्रेष्ठ है,संकल्पजनित यह तुच्छ देह श्रेष्ठ नहीं, क्योकि जो चित्रदेह में गुण विद्यमान हैँ, वे संकल्पजनित देह में नहीं हैं