Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
ये गुणाश्चित्रदेहे हि न ते संकल्पदेहके ।
चित्रदेहादपि जडाद्योऽयं तुच्छतरः किल ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे निष्पाप श्रीरामजी, अत्यन्त जड़
चित्रित शरीर की अपेक्षा भी जो यह संकल्पजनित तुच्छातितुच्छ देह है, उस मांसरूप देह में आपको
आसक्ति ही क्या ?