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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

विरराम मुनेर्वारि सस्येष्वम्बुधरादिव । अथ याते मुहूर्तार्धे राघवे प्रतिबोधिते ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

राजन्‌, तदनन्तर जब आधा मुहूर्त व्यतीत हो गया और श्रीरामभद्र प्रबुद्ध हो गये यानी समाधि से उत्थित हो गये, तब उसी अर्थ की पुष्टि के लिए वाम्मियों में श्रेष्ठ श्रीवसिष्ठजी उनसे पुनः कहने लगे