Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
अस्य मा भृत्यतां गच्छ त्वमहंकारदुर्मतेः ।
अस्य भृत्यतया राम निरयः प्राप्यते फलम् ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
रामभद्र, आप इस
दुष्टबुद्धि अहंकार की दासता को प्राप्त मत हो जाइए, क्योकि इसकी दासता से नरकरूप फल की
प्राप्ति होती हे