Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 42
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 42 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 42
संस्कृत श्लोक
शून्यं देहगृहं प्राप्य चित्तयक्षेण तत्कृतम् ।
भीता येन महान्तोऽपि समाधिनियताः स्थिताः ॥ ४२ ॥
हिन्दी अर्थ
शून्य देहरूपी घर प्राप्तकर चित्तरूपी
यक्ष ने वह काम किया है, जिससे कि बड़े-बड़े तत्त्ववेत्ता भी भय खाकर समाधि में तत्पर होकर स्थित
हैं