Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 50
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 50 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 50
संस्कृत श्लोक
विवेकधैर्यहीनेन स्वाहंकारमहोत्सवः ।
मूर्खेणालम्बितो येन नष्टमेवाशु विद्धि तम् ॥ ५० ॥
हिन्दी अर्थ
विवेक एवं धैर्य से हीन जिस मूर्ख ने अपने अहंकाररूपी महोत्सव का
अवलम्बन किया, उसे आप तत्काल विनष्ट ही जानिए