Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 51
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 51 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 51
संस्कृत श्लोक
अहंकारपिशाचेन वराका ये वशीकृताः ।
त एते नरकाग्नीनां राघवेन्धनतां गताः ॥ ५१ ॥
हिन्दी अर्थ
अहंकार को परलोक मे भी दुःख ही प्राप्त होता है, यों कहते हैं।
हे राघव, जिन बिचारों को अहंकाररूपी पिशाच ने अपने अधीन बना लिया, वे सब नरकरूपी
अग्नियों के इन्धन ही बन गये