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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 84

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 84 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 84

संस्कृत श्लोक

यथोपलस्योपलता घटस्य घटता यथा । सत्तामात्रादभिन्नैव मानसादि तथात्मनः ॥ ८४ ॥

हिन्दी अर्थ

यह न्याय प्रत्येक घट और घटाकार मानसवृत्ति आदि में भी लगाना चाहिए, इससे सद्रूप अद्वैत ही सिद्ध हआ, यह कहते हैं। जैसे पत्थर का पत्थरपन अथवा जैसे घट का घटपन सत्तास्वरूप सामान्य से अभिन्न ही है, वैसे ही समष्टि-व्यष्टि मन आदि आत्मा से अभिन्न ही हे