Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 85
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 85 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 85
संस्कृत श्लोक
अत्रेमामपरां दृष्टिं महामोहविनाशिनीम् ।
शृणु या कथिता पूर्वं मम कैलासकन्दरे ॥ ८५ ॥
हिन्दी अर्थ
भद्र, इस अर्थ में आगे कही जानेवाली
मानस-शिवपूजारूप इस दूसरी दृष्टि का आप श्रवण कीजिए, जो चन्द्रमौलि भगवान शंकर ने
कैलासपर्वत की कन्दरा में संसार-दुःख की शान्ति के लिए मेरे समक्ष की थी