Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 93
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 93 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 93
संस्कृत श्लोक
खड्गच्छेद्यान्धकारेषु कुञ्जेषु गहनेषु च ।
एतस्मिन्नन्तरे तत्र यामार्धे प्रथमे गते ॥ ९३ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीरामभद्र, इसी बीच प्रथम अर्धरात्रि के वहाँ
व्यतीत हो जाने पर मैंने अपनी समाधि स्वल्प (कुछ बहिर्मुख) बनाकर बाह्य पदार्थों की ओर दृष्टि
दौड़ाई