Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 29, Verse 98
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 29, verse 98 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 29 · श्लोक 98
संस्कृत श्लोक
अगमं सुमनास्तस्य दृष्टिपूतमहं पुरः ।
तत्र पुष्पाञ्जलिं दत्त्वा दूरादेव त्रिलोचनः ॥ ९८ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ जाकर दूर
से ही मैंने पुष्पांजलि समर्पित की और अर्घ्य प्रदान किया । अनन्तर तीन नेत्रवाले महादेव को साष्टांग
प्रणाम कर उनका अभिवन्दन किया यानी उनकी स्तुति की