Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 3, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 3, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 3 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
यन्नास्ति तस्य सद्भावप्रतिपत्तिरुदाहृता ।
मायेति सा परिज्ञानादेव नश्यत्यसंशयम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
“माया शब्द का प्रयोग किया गया हे । वह माया एकमात्र आत्मज्ञान से ही निश्चित विनष्ट हो जाती
है