Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 13

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

संवित्सर्वकलातीता सर्वभावान्तरस्थिता । सर्वसत्ताप्रदा देवी सर्वसत्तापहारिणी ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

समस्त कल्पनाओं से वर्जित, सकल भावपदार्थो के भीतर रहनेवाली, निखिल पदार्थो में सत्तास्फूर्ति प्रदान करनेवाली तथा अखिल पदार्थो की सत्ता का अपहरण करनेवाली जो संवित्‌ देवी है, वही देव है