Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verses 22–23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verses 22–23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
स करोति स चाश्नाति स बिभर्ति प्रयाति च ।
सनिःश्वसिति संवेत्तासोऽङ्गान्यङ्गानि वेत्ति च ॥ २२ ॥
सोऽस्यां विचित्रचेष्टायां प्रकाशिन्यां च तद्वशात् ।
तत्स्वरूपनिबद्धायां पुर्यामास्ते मुनीश्वर ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वही सबका कर्ता ओर भोक्ता है, यो कहते है।
वही आत्मदेव क्रिया करता हे, वही खाता है, वही पालन करता है, वही जाता है, वही श्वास लेता
है, वही गाता है और वही अंग-अंग को जानता है