Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
मनःषष्ठेन्द्रियाचारसत्तातीतामलात्मनः ।
तस्य संव्यवहारार्थं संज्ञा चिदिति कल्पिता ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जो मन
को लेकर छः इन्द्रियों की प्रवृत्ति-सत्ता से रहित तथा निर्मल रूपवान है, उस आत्मदेव का उपदेशादि
व्यवहार के लिए "चित्" यह काल्पनिक नाम पड़ा है