Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
स एष चिन्मयः सूक्ष्मः सर्वव्यापी निरञ्जनः ।
इमं भास्वरमाभासं करोति न करोति च ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
वही यह परमात्मा चिद्रूप, सूक्ष्म, सर्वव्यापी
ओर मायारहित हे । वही भास्य के आरोप-काल में इस भास्वर सांसारिक आभास का मानों निर्माण
करता हे ओर भास्य के अपवाद-काल में निर्माण नहीं भी करता है