Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
विष्णोः पद्मालितामेत्य चिद्ध्यानाधीनमानसा ।
त्रयी नलिन्याः सरसीं धत्ते पैतामहीं स्थितिम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
ब्रह्मन्, चिति ने ही वृषभ और चन्द्रमा के चिन्हों से युक्त त्रिनेत्ररूप धारणकर गौरीरूपी कमलिनी के
मुखपद्म में भ्रमररूपता प्राप्त की ॥ ३ ८॥ भगवान नारायण के नाभि-कमल में मानों भ्रमररूपता प्राप्तकर
ध्यान मेँ आसक्त मनवाली चिति वेदरूपी कमलिनी का महान सरोवरस्वरूप ब्रह्माजी की आकृति
धारण करती हे