Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 53

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 53 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 53

संस्कृत श्लोक

चिता चावर्तवर्तिन्या सिद्धान्येव प्रनृत्यति । जगज्जालरजोलेखा तत्सत्ता दृश्यदेहिनी ॥ ५३ ॥

हिन्दी अर्थ

झंझावात के आवर्त में रहनेवाली, एकमात्र चिति से ही सिद्ध हुई और उसी की सत्ता के कारण दर्शनयोग्य आकार से युक्त हुई जगत्समूहरूपी धूलिरेखा चित्‌ से व्यतिरिक्त-सी होकर नाचती रहती है