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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 59

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 59 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 59

संस्कृत श्लोक

चिदाकाशप्रकाशेऽस्मिन्संकल्पशिशुधारिणी । क्रियाकुलवधूर्देहगृहे स्फुरति चञ्चला ॥ ५९ ॥

हिन्दी अर्थ

जिसमें चैतन्याकाश का प्रकाश विद्यमान है, ऐसे इस देहरूपी घर में संकल्प रूपी लड़कों को धारण करनेवाली, विहित एवं निषिद्ध क्रियाओं में प्रवृत्तिरूप चंचल कुलवधू परिस्फुरित होती हे