Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 63
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 63 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
श्रीवसिष्ठ उवाच ।
इत्युक्तवांस्तदा त्र्यक्षः सुधांशुस्वच्छया गिरा ।
पुनः पृष्टो मया राम सुधांशुस्वच्छया गिरा ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
महाराज वसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामजी, चन्द्रमा की किरणों के सदृश निर्मलवाणी से त्रिनेत्र
श्रीशिवजी ने जब वैसा कहा, तब फिर मेने भी चन्द्रमा की किरणों के सदृश निर्मल वाणी से उनसे
पूछा