Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 66

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 66 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 66

संस्कृत श्लोक

ईश्वर उवाच । श्रृण्वेतदखिलं ब्रह्मन्यदा पृष्टं वदामि ते । महानयं त्वया प्रश्नः कृतो ब्रह्मविदां वर ॥ ६६ ॥

हिन्दी अर्थ

“यथा तच्चेतनस्यैव जीवादित्वं तदुच्यताम्‌“ इस पूर्व प्रश्न का उत्तर बिना सुने ही वसिष्ठजी ने यह एक और दूसरा प्रश्न किया है, तो भी एक साथ दोनों प्रश्नों का उत्तर देने की इच्छावाले भगवान श्री शंकर कहते हैँ । ईश्वर ने कहा : हे ब्रह्मन्‌, जो आपने प्रश्न किया है, वह सब कुछ (पहले किये गये प्रश्नों के उत्तरो से युक्त सब कुछ) मेँ आपसे कहता हूँ; इसे सुनिए। हे तत्त्वज्ञो में श्रेष्ठ, आपने यह एक बहुत बड़ा प्रश्न किया हे