Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 30, Verse 75
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 30, verse 75 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 30 · श्लोक 75
संस्कृत श्लोक
अनन्तसंकल्पमयी जाड्यसंकल्पपीवरा ।
चिज्जाड्यान्मोदमायाति पयः पाषाणतामिव ॥ ७५ ॥
हिन्दी अर्थ
अनन्त संकल्पो से
ओतप्रोत तथा जडता के संकल्प से स्थूल हुई यह चिति ही जडता से जीवनरूपता का भ्रम उस प्रकार
प्राप्त करती है, जिस प्रकार जल पाषाणरूपता (बरफरूपता) प्राप्त करता है