Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 11
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
न शून्यताशून्यते वा शिलाकोश इव द्रुमः ।
शून्यताशून्यता नाम महती ख इवाखता ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
इसमें शून्यता और अशून्यता इस प्रकार नहीं है, जिस प्रकार शिला के गर्भ में
वृक्ष आकाश में अनाकाशता की नाई भिन्न-भिन्न वादियों के द्वारा कल्पित प्रसिद्ध महती शून्यता
ओर अशून्यता विचार करने पर जैसे नहीं रहती केवल केवलीभावलक्षण स्वरूपस्वच्छता ही अवशेष
रहती है, न कि अणुमात्र भी उससे कुछ भिन्न, वैसे ही इस चिति में भी शून्यता और अशून्यता हे