Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
स्वारोपशान्त्या स्वादर्शो यथैति प्रतिमास्थितिम् ।
तथा सर्गमिवागम्य बोधात्स्वं याति तत्पदम् ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
जिस प्रकार सुन्दर दर्पण अपने ऊपर आरोपित मल की शान्ति से प्रतिमा स्थिति
(बार-बार प्रतिबिम्ब की अभिव्यक्ति के योग्य स्वच्छतारूप स्थिति) प्राप्त करता है, उसी प्रकार अज्ञान
से जडता, जीवता आदि सृष्टि मानों प्राप्तकर स्थित हुई चिति भी तत्त्वज्ञान से अपना स्वच्छतारूप
कैवल्यपद प्राप्त करती है