Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
अभाववेदनादस्याः संसारः संप्रवर्तते ।
स्वभाववेदनादेष त्वसदेवोपशाम्यति ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
असत्-रूप अज्ञान के लाभ से चिति का संसार बढता जाता है
ओर सच्चिदानन्दस्वरूप चितिस्वभाव के ज्ञान से यह संसार असत्-रूप ही होकर शान्त हो जाता
है