Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 39
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
रथस्त्वस्याश्चितेर्जीवो जीवस्याहंकृती रथः ।
अहंकृते रथो बुद्धिस्ततो बुद्धेर्मनो रथः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
अव चैतन्य के बाहर निर्गमन मे रथ- परम्परा की कल्पना करते हुए कहते हैं।
इस चिति का रथ जीव है, जीव का रथ अहंकार है, अहंकार का रथ बुद्धि है और बुद्धि का
रथ मन है