Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 40
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 40 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
मनसस्तु रथः प्राणः प्राणस्याक्षगणो रथः ।
अक्षौघस्य रथो देहो देहस्य स्यन्दनो रथः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
मन का रथ प्राण है, प्राण का रथ इन्द्रिय समूह है, इन्द्रियसमूह का रथ देह
है ओर देह का रथ कर्मेन्द्रिय-समुदाय है