Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
नानाऽनाना न चाप्यन्तरणाविव सुमेरवः ।
न च शब्दार्थशब्दश्रीर्महोषरलता यथा ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे परमाणु के अन्दर सुमेरु नहीं रहते, वैसे ही इसमें अनेक प्रकार के जीव
तथा प्रत्येक शरीर में आत्मा के अभेदाध्यास भी नहीं रहते । इसमें शब्द ओर अर्थ (नाम और रूप) की
कथा तो इस प्रकार नहीं हे, जिस प्रकार महा ऊसर भूमि में लता की