Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
नाहंत्वत्वंत्वतत्त्वादि पर्वतत्वमिवाम्बरे ।
सदेहत्वान्यदेहत्वे शङ्खत्वमिव कज्जले ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आकाश में पर्वतत्व नहीं हे, वैसे ही चिति में अहन्ता, त्वन्ता ओर तत्ता दूसरी
परोक्षवस्तुता) आदि (८) नहीं है । जैसे काजल में शंखत्व नहीं रहता, वैसे ही चिति मे स्वदेहत्व ओर
अन्यदेहत्व नहीं रहते