Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 31, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 31, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 31 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
न मातृमेयमानानि नभसीव नवाङ्कुरः ।
न चिच्चेतनचेत्यादि नन्दने खदिरो यथा ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
चिति में चित्तवृत्ति, चेतन (चित्तवृत्ति के आश्रय) ओर चेत्य (उक्त वृत्ति के विषय) आदि का (00)
अभाव है