Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 12
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 12 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
शरीरशकटानां हि कर्षणे परमात्मना ।
मनःप्राणोदयौ ब्रह्मन्कृतौ कर्मकृतौ दृढौ ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
हे ब्रह्मन्, परमात्मा ने ही शरीररूपी गाड़ी खींचने के लिए
मनःशक्ति और प्राण-शक्ति ये दो सुदृढ़ नौकर या बैल उत्पन्न किये हैं