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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 11

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 11 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 11

संस्कृत श्लोक

कर्मात्मना वराकेण जीवेन मनसामुना । चाल्यन्ते देहयन्त्राणि पाषाणा इव वायुना ॥ ११ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार पाल आदि उपाधि के वशीभूत हुए वायु के द्वारा नाव में स्थित पत्थर अपने अभीष्ट स्थान की ओर संचालित किये जाते हैं, उसी प्रकार उक्त रीति से क्रियास्वभाव को प्राप्त, मनन-शक्तियुक्त इस जीव के द्वारा, जो कि उपाधि-परवश होने से अत्यन्त दीन है, देहरूप यन्त्र संचालित किये जाते हैं