Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 17

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 17 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

परमात्मनि चित्तत्त्वे स्थिते सति निरामये । जीवो जीवति सालोकं दीपे सति गृहं यथा ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

पारमार्थिक चिन्मात्रस्वरूप से युक्त, विकाररहित परमात्मा की स्थिति रहने पर ही यह जीव अपना प्रकाशमय जीवन उस प्रकार धारण करता है, जिस प्रकार दीपक की स्थिति रहने पर घर प्रकाशमय जीवन धारण करता हे