Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

निःस्पन्दे पद्मपत्रेऽन्तः प्राणाः शान्तिं प्रयान्त्यमी । तालवृन्ते यथाऽस्पन्दे बहिः पवनशक्तयः ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

हृदय -प्रदेश में स्थित उस पद्य-पत्र के कम्पनशून्य हो जाने पर ये प्राण भीतर तेज में उस प्रकार विलीन हो जाते हैं, जिस प्रकार लोक में पंखे के कम्पनशून्य हो जाने पर पवन की शक्त्यो विलीन हो जाती हैँ