Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 44
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 44 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 44
संस्कृत श्लोक
सर्वगा हि चिदंशेन जीवीभूयाभवन्मनः ।
मनः पुर्यष्टकरथमाक्रामति ततो जगत् ॥ ४४ ॥
हिन्दी अर्थ
चित्त के संसरण में क्रम बतलाते हैं।
सर्वगामिनी इस चिति ने ही बुद्धि में प्रतिबिम्बित अपने अंश से जीवरूप होकर मनरूपता प्राप्त की
है। वह मन पुर्यष्टकरूपी रथ पर चढ़ जाता हे । अनन्तर इस जगत में यत्र-तत्र घूमता रहता है