Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 48
संस्कृत श्लोक
जीवशक्तया परामृष्टे निरुद्धे पद्मयन्त्रके ।
प्राणे संरोधमायाते म्रियते मानवो मुने ॥ ४८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद वह पहले की तरह मर जाता है, यह कहते हैं।
हे मुने, जीवसम्बन्धिनी पूर्वोक्त पूर्व -पूर्वं भोक्ता आदि भावों की स्मृतिरूप शक्ति से असम्बद्ध हो
जाने पर, अतएव पद्म-यन्त्र के निश्चल हो जाने पर तथा प्राण के रुद्ध हो जाने पर यह मनुष्य मर
जाता है