Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 32, Verse 47
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 32, verse 47 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 32 · श्लोक 47
संस्कृत श्लोक
स्वभाववशतो जीवो विस्मृत्या शक्तिमृच्छति ।
वैवश्यात्कालवशतः पर्णं जर्जरतामिव ॥ ४७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह जीव अज्ञानवश अपनी अजर-अमर ब्रह्मरूपता
भूलकर कालवश प्राप्त हुई वृद्धदेह में रहनेवाली अशक्तता स्वयं विवशता से उस प्रकार प्राप्त करता
है, जिस प्रकार पत्ता जीर्णता को प्राप्त करता है