Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
देशकालक्रियासत्तानियत्याद्याश्च शक्तयः ।
चिदात्मिका एव चितः सत्त्वात्संपतिताः स्वतः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
चूँकि देश, काल ओर क्रिया की सत्ता एवं नियति आदि शक्त्यो स्वयं चिति की सत्ता से ही सत्तायुक्त
होकर स्थित हैं, इसलिए (वे सब) चिदात्मक (चितिस्वरूप) ही हैं