Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
असंभवत्तरङ्गस्य चिद्विलासमहाम्बुधेः ।
तरङ्गितत्वमिव यत्तत्तावच्चेत्यसङ्गिता ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें तरगों की तनिक भी सम्भावना नहीं हे, एसे चिद्विलासरूपी
महासागर का, तरंगवत्ता की नाईं, जो विवर्तनव्यापार है, वही उसका चेत्य के साथ सम्बन्ध है