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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

यदिदं दृश्यते तस्यास्तल्लताया महाचितेः । फलपल्लवपुष्पादि न भिन्नं तन्मयं यतः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

जो यह संसार दिखाई दे रहा है, वह चूँकि उस महाचितिरूपी लता के तत्स्वरूप फल, पल्लव तथा पुष्प आदि रूप ही है, अतः उससे भिन्न नहीं है