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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 33, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 33, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 33 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

अद्वित्ववेदनाद्वित्वमात्मनोऽपि निवर्तते । न करोमीति संकल्पात्पुरुषस्येव कर्तृता ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

जिस प्रकार “मैं कुछ नहीं करता” इस तरह के संकल्प से पुरुष में कर्तृत्व निवृत्त हो जाता है, उसी प्रकार आत्मा का भी द्वैत, अद्वैत-भावना से निवृत्त हो जाता हे