Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 18
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 34, verse 18 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 18
संस्कृत श्लोक
दिक्कालाद्यनवच्छिन्नमहासत्तापदं गताम् ।
तुर्यतुर्यांशकलितामकलङ्कामनामयाम् ॥ १८ ॥
हिन्दी अर्थ
देशकृत एवं कालकृत परिच्छेद से रहित, सर्वातिशायी, त्रिकालाबाधित सत्ता पद को प्राप्त
हुई जाग्रत, स्वप्न ओर सुषुप्ति से चतुर्थ जो विराट, हिरण्यगर्भ ओर अव्याकृत से चतुर्थांश है, उससे
प्रकाशमान सर्वविध कलंकों ओर रोगों से रहित सत्ता का उक्त चितिशक्ति परिग्रह करती हे