Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 34, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
कांचिदेव विशालाक्ष साक्षिवत्समवस्थिताम् ।
सर्वतः सर्वदा सर्वप्रकाशस्वादुतत्पराम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे
विशालनेत्र, उक्त स्वरूपवाली किसी एक ऐसी अनिर्वचनीय सत्ता का चितिशक्ति परिग्रह करती हे,
जो साक्षी की नाई प्रकाशमान होकर अवस्थित रहती है ओर सबकी हेतु, सब काल में विद्यमान समस्त
वस्तुओं के प्रकाशो तथा आनन्दं से श्रेष्ठ और स्पृहणीयतर है