Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 34, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
एषा द्वितीया पदता कथिता तव सुव्रत ।
तृतीयं श्रृणु वक्ष्यामि पदं पदविदां वर ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
उक्त तुर्यरूप द्वितीय भूमिका का उपसंहार करके तृतीय भूमिका का अवतरण करते है।
हे उत्तम व्रत का आचरण करनेवाले, तत्त्वज्ञो मे श्रेष्ठ महर्षे, यह द्वितीय भूमिका आपसे कही गई ।
अब मैं तृतीय भूमिका का निरूपण करूँगा, आप सुनिये