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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Purva (Liberation, Part 1), Sarga 34, Verse 22

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध), सर्ग 34, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (पूर्वार्ध) · सर्ग 34 · श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

स्थैर्येण कालतः स्वस्था निष्कलङ्का परात्मना । तुर्यातीतादिनामत्वादपि याति परं पदम् ॥ २२ ॥

हिन्दी अर्थ

यह तृतीय भूमिका जन्म आदि छः भावविकारों से शून्य होने के कारण काल से भी विचलित नहीं होती, अज्ञान आदि अन्धकार से विनिर्मुक्त वह स्वयं ही कलंको से रहित हे। तुर्यातीत आदि उनका नाम होने से भी वह सर्वातिशायी परमपुरुषार्थरूप है